सीतापुर। भारतीय शिक्षा समिति द्वारा आनंदी देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में नव चयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के वंदना सत्र में प्रदेश निरीक्षक रामजी सिंह प्रान्त सेवा शिक्षा संयोजक और गोरक्ष प्रांत के प्रदेश निरीक्षक कमलेश जी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा 'अनुगूँज' पत्रिका का विमोचन भी किया गया। मुख्य विषय: विद्यालय विकास में आचार्य की भूमिका।आचार्य का घर, विद्यालय और समाज के बीच समन्वय होना चाहिए।आधुनिक शिक्षा: नवीन शिक्षण विधियों और प्रविधियों का निरंतर विकास जरूरी है। कौशल विकास: 21वीं सदी के कौशलों के लिए आचार्यों को स्वयं तैयारी करनी होगी।
"एक आचार्य की भूमिका केवल शिक्षक तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज और विद्यार्थियों के लिए एक मार्गदर्शक और सहयोगी के रूप में कार्य करता है।"
समापन सत्र की पूर्व संध्या पर 'पंचपरिवर्तन' विषय पर विशेष चर्चा का आयोजन
सीतापुर। इंदिरा नगर, ए-ब्लॉक स्थित सरस्वती विद्या मंदिर (स०वि०म०) के प्रधानाचार्य श्रीमान देवेन्द्र कुमार शुक्ल की गरिमामयी उपस्थिति में समापन सत्र की पूर्व संध्या पर एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए 'पंचपरिवर्तन मूल्यांकन एवं क्रियान्वयन' पर गहन मंथन करना था।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से पांच प्रमुख बिंदुओं पर विचार-विमर्श और भावी योजनाओं को लागू करने पर जोर दिया गया:
स्व का बोध: व्यक्ति को अपनी संस्कृति और पहचान को पहचानना होगा।
कुटुम्ब प्रबोधन: पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना और समाज को जोड़ना।
पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति की रक्षा के लिए निरंतर सजग और सक्रिय रहना।
सामाजिक समरसता: समाज में भेदभाव मिटाकर आपसी भाईचारा बढ़ाना।
नागरिक कर्तव्य: देश के प्रति अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन करना।
प्रधानाचार्य जी ने इन सभी बिंदुओं को व्यावहारिक रूप में अपनाने और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सायं 5 बजे के सत्र में श्रीमान रामजी सिंह, प्रदेश निरीक्षक जी नवीन आचार्यो के साथ संवाद करते हुए कहा आप सभी ने यहां जो सीखा है उसमें से आप क्या एक बदलाव करेंगे इसपर सभी ने अपने अपने विचार रखें और एक सकारात्मक चर्चा हुई।
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