info@bssawadhprant.org

भारतीय शिक्षा समिति , उत्तर प्रदेश

सरस्वती कुञ्ज , निरालानगर, लखनऊ

लखीमपुर : महर्षि वाल्मीकि जयंती हर्षोल्लास से मनाई गई

लखीमपुर। सनातन धर्म सरस्वती शिशु वाटिका में महर्षि वाल्मीकि जयंती श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।  कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती हीरा सिंह जी ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे हिंदू साहित्य जगत के प्रथम कवि - आदिकवि थे। उन्होंने रत्नाकर से वाल्मीकि बनने के प्रेरक प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पहले वाल्मीकि जी का नाम रत्नाकर था, जो जंगल में लूट-पाट करते थे। एक दिन नारद मुनि मिले तो रत्नाकर ने उन्हें लूटना चाहा। नारद जी ने पूछा - "तुम ये पाप किसके लिए करते हो?" रत्नाकर ने कहा - "परिवार के लिए।" नारद जी ने कहा - "जाकर पूछो, क्या तुम्हारे पाप में तुम्हारा परिवार भागीदार बनेगा?" रत्नाकर ने सबसे पूछा तो सबने मना कर दिया। तब उन्हें ज्ञान हुआ। फिर नारद जी ने उन्हें "राम" मंत्र दिया। रत्नाकर इतने वर्षों तक तपस्या में लीन रहे कि उनके शरीर पर दीमकों ने बांबी (वाल्मीक) बना दी, इसलिए उनका नाम वाल्मीकि पड़ा। 

 उन्होंने कहा कि तात्पर्य यह है कि कोई भी व्यक्ति बुरा पैदा नहीं होता, सत्संग और साधना से बड़ा बन सकता है। शिशु वाटिका के नन्हें-मुन्नें भैया-बहनों द्वारा महर्षि वाल्मीकि के चरित्र को प्रदर्शित करती हुई एक लघु नाटिका भी प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम की संयोजिका बहन ममता गुप्ता जी ने कहानी के माध्यम से बच्चों को महर्षि वाल्मीकि के विषय में जानकारी दी। इस अवसर पर शिशु वाटिका की समस्त शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ।

 

© Bhartiya Shiksha Samiti, U.P, Awadh Prant. All Rights Reserved.