info@bssawadhprant.org

भारतीय शिक्षा समिति , उत्तर प्रदेश

सरस्वती कुञ्ज , निरालानगर, लखनऊ

अंबेडकरनगर : प्रांतीय संस्कृति महोत्सव का भव्य शुभारंभ, 13 जिलों के भैया-बहनों ने बिखेरी भारतीय संस्कृति की छटा

अंबेडकरनगर। विद्या भारती विद्यालय, जय बजरंग इंटरमीडिएट कॉलेज, रामनगर, अंबेडकर नगर के प्रांगण में तीन दिवसीय प्रांतीय संस्कृति महोत्सव का भव्य एवं गरिमामयी शुभारंभ हुआ। 24 से 26 अक्टूबर तक आयोजित इस महोत्सव में उत्तर प्रदेश के 13 जिलों से आए भैया-बहन विभिन्न बौद्धिक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं अन्य गणमान्य जनों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। विद्यालय के भैया-बहनों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। स्थानीय प्रधानाचार्य डॉ. राजेंद्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया तथा विद्यालय परिवार की ओर से अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। प्रांत संयोजक श्री देवेंद्र कुमार शुक्ल ने महोत्सव की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, सांस्कृतिक चेतना तथा राष्ट्रीयता की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता जय बजरंग ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, रामनगर के प्रबंधक श्री अंजनी कुमार वर्मा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उप जिलाधिकारी, आलापुर उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि श्रीमती महिमा मिश्रा, उपनिबंधक, आलापुर तथा मुख्य वक्ता के रूप में श्री रामजी सिंह, प्रदेश निरीक्षक, भारतीय शिक्षा समिति, उत्तर प्रदेश पूर्वी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इसके अतिरिक्त श्री अवरीश जी, श्री मुनींद्र जी, श्री उत्तम मिश्र जी, श्री सुरेश जी, प्रबंध समिति के सदस्यगण, विभिन्न विद्यालयों से आए संरक्षक आचार्य, आचार्या बहनें, शिक्षकगण एवं पत्रकार बंधु उपस्थित रहे। अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री अंजनी कुमार वर्मा ने कहा कि विद्या भारती का मंच विद्यार्थियों को बौद्धिक विकास के साथ सांस्कृतिक एवं नैतिक दृष्टि से सशक्त बनाता है। 13 जिलों के भैया-बहनों का एक मंच पर एकत्र होना भारतीय सांस्कृतिक एकता का परिचायक है।

मुख्य वक्ता श्री रामजी सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृति केवल नृत्य एवं संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली, परंपराओं एवं संस्कारों का समग्र स्वरूप है। विद्या भारती का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है, जो आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के साथ भारतीय जीवन-मूल्यों के प्रति भी गौरव का भाव रखें।

महोत्सव के प्रथम दिवस से ही विभिन्न प्रतियोगिताएं प्रारंभ हो गईं। इनमें प्रश्न मंच, कथोपकथन, मूर्तिकला, आशुभाषण, लोक नृत्य तथा आचार्य पत्र वाचन प्रमुख हैं। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने तथा भारतीय संस्कृति की विविधता को समझने का अवसर प्राप्त हो रहा है। तीन दिवसीय प्रांतीय संस्कृति महोत्सव का समापन 26 अक्टूबर को भव्य समारोह एवं पुरस्कार वितरण के साथ निर्धारित है। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को मेडल, प्रमाणपत्र एवं ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम का समापन आभार प्रदर्शन एवं शांति पाठ के साथ हुआ। यह महोत्सव विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता, रचनात्मकता एवं भारतीय संस्कारों के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 

© Bhartiya Shiksha Samiti, U.P, Awadh Prant. All Rights Reserved.