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भारतीय शिक्षा समिति , उत्तर प्रदेश

सरस्वती कुञ्ज , निरालानगर, लखनऊ

सम्पर्क ही हमारी विद्या भारती के कार्य का आधार : बृजेन्द्र मिश्र

शुक्लागंज, उन्नाव। सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज, गोपीनाथपुरम में आयोजित उन्नाव संकुल के आचार्य विकास वर्ग के चौथे एवं समापन सत्र से पूर्व अवरीश जी ने माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलन किया तथा वन्दना के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

शैक्षिक सत्र में बृजेन्द्र जी मिश्र ने “विद्या भारती के विद्यालयों में सम्पर्क ही कार्य का आधार है” विषय पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सतत सम्पर्क के माध्यम से विद्यालय छात्र एवं अभिभावकों से निरन्तर जुड़ा रहता है तथा उनके सर्वांगीण विकास में प्रभावी सहयोग प्रदान करता है। इस अवसर पर अवरीश जी ने शिशु लेखा, आचार्य लेखा तथा अन्य कार्यालय एवं छात्र पंजियों के लेखन, संरक्षण और उनके महत्व पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।

समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए उन्नाव विभाग के माननीय विभाग प्रचारक अमरजीत सिंह ने कहा कि यदि भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित करना है और उसे एक सशक्त राष्ट्र बनाना है, तो संगठित शक्ति का निर्माण आवश्यक है। भारत का उत्थान तभी सम्भव है जब शिक्षा भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों के आधार पर प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का मानसिक, बौद्धिक एवं शारीरिक विकास नियमित शाखा से जुड़कर ही पूर्ण रूप से सम्भव हो पाता है। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्रवण कुमार सिंह ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया तथा ए.बी. नगर के प्रधानाचार्य चन्द्रेश जी को अंगवस्त्र एवं श्रीरामचरितमानस भेंट कर सम्मानित किया। 

विद्यालय के प्रबन्धक राकेश कुमार जी ने माननीय विभाग प्रचारक अमरजीत सिंह जी को अंगवस्त्र, श्रीरामचरितमानस एवं श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही संकुल से पधारे सभी आचार्यों को उपहार देकर उनका अभिनन्दन किया।

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