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भारतीय शिक्षा समिति , उत्तर प्रदेश

सरस्वती कुञ्ज , निरालानगर, लखनऊ

लखीमपुर: संकुल स्तरीय आचार्य विकास वर्ग का भव्य समापन, राष्ट्रभावना व संस्कारयुक्त शिक्षा पर हुआ मंथन

लखीमपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज (सीबीएसई), लखीमपुर-खीरी में आयोजित पांच दिवसीय संकुल स्तरीय 'आचार्य विकास वर्ग' का सोमवार को गरिमामय वातावरण में समापन हुआ। प्रशिक्षण वर्ग में विभिन्न विद्यालयों से आए आचार्यों ने आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक चेतना तथा व्यक्तित्व विकास से जुड़े विविध विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

समापन दिवस का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ प्रधानाचार्य श्रवण कुमार अवस्थी ने अतिथियों का परिचय कराया। कार्यक्रम में विभाग प्रचारक अभिषेक जी, संभाग निरीक्षक गोपाल राम मिश्र, जिला प्रचारक आजाद जी, संकुल प्रमुख डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह, प्रबंधक विमल अग्रवाल, कोषाध्यक्ष रामलाल जी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास व भारतीय संस्कृति पर व्याख्यान : मुख्य वक्ता विभाग प्रचारक अभिषेक जी ने "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय संस्कृति" विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि समय-समय पर समाज में आई विकृतियों को दूर करने के लिए महापुरुषों ने समाज सुधार का कार्य किया है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी उसी राष्ट्रवादी परंपरा का परिणाम है। उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार के बाल्यकाल के प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रभक्ति एवं संगठन की भावना पर प्रकाश डाला। साथ ही भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था, आर्थिक समृद्धि एवं सांस्कृतिक गौरव का भी उल्लेख किया।

विद्यालय बनें सामाजिक चेतना के केंद्र: अंतिम दिवस के अन्य सत्र में संभाग निरीक्षक गोपाल राम मिश्र ने "विद्यालय सामाजिक चेतना का केंद्र कैसे बने" विषय पर विचार रखते हुए कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रयोगशाला हैं। उन्होंने सकारात्मक वातावरण, नैतिक शिक्षा, अभिभावक संपर्क, पूर्व छात्र सहभागिता, विद्वत परिषद गठन तथा गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष बल दिया।

आचार्य राष्ट्र निर्माण की धुरी : डॉ. महेंद्र कुमार: समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. महेंद्र कुमार ने "आचार्य जीवन की सार्थकता" विषय पर कहा कि आचार्य केवल शिक्षक नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है। उसका दायित्व विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में ज्ञान के साथ संस्कारों का बीजारोपण करना है।

आभार ज्ञापन: कार्यक्रम के अंत में प्रबंधक विमल अग्रवाल ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, प्रबंध समिति तथा सहयोगी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि संस्कारयुक्त शिक्षा, श्रेष्ठ आचरण और राष्ट्रभावना से युक्त आचार्य ही समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

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