कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में यशोदा कन्या महाविद्यालय, मिश्रिख की प्राचार्य एवं मानवाधिकार एसोसिएशन की अध्यक्षा डॉ. ज्योति वैश्य उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य रामनिवास सिंह ने की।
मातृ भारती की संयोजिका गीतिका बाजपेयी ने प्रस्ताविकी प्रस्तुत करते हुए महिलाओं में निहित सप्तशक्तियों—श्री, कीर्ति, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति एवं क्षमा—पर विस्तार से प्रकाश डाला। सह-संयोजिका नीतू देवी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि डॉ. ज्योति वैश्य ने कहा कि मातृ भारती का मुख्य उद्देश्य माताओं के भीतर निहित शक्ति को जागृत करना है। उन्होंने राम और रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों ही परम ज्ञानी थे, लेकिन संस्कारों के अंतर ने उनके जीवन की दिशा अलग कर दी। उन्होंने कहा कि आज मोबाइल और सोशल मीडिया बच्चों के सामने बड़ी चुनौती हैं। बच्चों को इनके दुष्प्रभावों से बचाने के लिए माताओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
विद्यालय के प्रधानाचार्य रामनिवास सिंह ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों का केंद्र भी है। संस्कार के बिना ज्ञान अधूरा है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती समाज के सहयोग से समाज के लिए कार्य करने वाला विशाल शैक्षिक परिवार है और यह विद्यालय भी समाज के सहयोग से निर्मित हुआ है।
कार्यक्रम में उपस्थित मातृशक्तियों में श्रीमती पूर्णिमा, श्रीमती सीमा एवं श्रीमती ऋचा ने भी अपने विचार रखे और भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
अंत में आचार्या मीनाक्षी सिंह ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित मातृशक्ति का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन आचार्या अर्चना मिश्रा द्वारा शांति मंत्र के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माताओं के साथ विद्यालय की सभी आचार्या बहनें उपस्थित रहीं।
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